Maa Poem In Hindi | Hindi Maa Poetry Poem | माँ कविता

Spread the love

In this page you will read best maa poem, Maa poetry in hindi, mother poetry in hindi, Maa Poem in hindi, Maa kavita in hindi…

Maa Poem In Hindi- मां से ज्यादा

Maa poem in Hindi

ममता की देवी को लोगों ने
मां के नाम से जाना है
मां से बढ़कर कुछ नहीं है
ये उस भगवान ने भी माना है
वो खाली हाथ नहीं होगा
जो अपनी मां की शरण में जाएगा
क्योंकि एक बच्चे को उसकी मां से ज्यादा
और कोई नहीं समझ पाएगा

सबकी देख-रेख करते करते
वो खुद को भूल जाती है
अपने आंचल से छाँव देती है
जब भी धूप तेज आती है
उस मां के बगैर किसी
को कभी जीना नहीं आएगा
क्योंकि एक बच्चे को उसकी मां से ज्यादा
और कोई नहीं समझ पाएगा

जब कभी कभी चोट लगती है
सबसे पहले दवा वही करती है
जो हम महसूस करते हैं
शायद वो भी वही महसूस करती है
जो अपनी मां को बीच मझधार में छोड़ेगा
वो भी तैर नहीं पाएगा
क्योंकि एक बच्चे को उसकी मां से ज्यादा
और कोई नहीं समझ पाएगा

उसकी ममता को दुखी मत करना
उसी के कदमों में पूरा जहां है
जिसकी नाराजगी में भी प्यार होता है
कोई और ऐसा कहां है
जो उसके बगैर जीने की सोचेगा
वो सिर्फ घाव ही पाएगा
क्योंकि एक बच्चे को उसकी मां से ज्यादा
और कोई नहीं समझ पाएगा

Maa Hindi Poem – मां से बढ़ के कुछ नहीं है

Maa poem in hindi

अपनी मां की खुशियों के लिए
मैं कुछ भी कर सकता हूं
अपने हिस्से की सारी खुशियों को
उसके क़दमों में रख सकता हूं
सबकुछ करके देखा है मैंने
उसके बगैर मुझे कहीं सुख नहीं है
मेरी मां से बढ़ के मेरे लिए
अब और कुछ भी नहीं है

जब तक उसकी छाँव में था
मेरे गमों को वो समेट लेती थी
मैं रोटी अगर एक मांगता था
तो वो एक ज्यादा दे देती थी
मैंने ढूंढा चारों दिशाओ में
कोई उसके जैसा नहीं है
मेरी मां से बढ़ के मेरे लिए
अब और कुछ भी नहीं है

जब कभी भी चोट लगती है
सबसे पहले उसी का खयाल आता है
किसी को उसकी मां के साथ देखता हूं
तो मुझे मेरा बचपन याद आ जाता है
उसकी जगह कोई और ले ले
कोई मेरे इतना करीब नहीं है
मेरे मां से बढ़ के मेरे लिए
अब और कुछ भी नहीं है

प्यार उसका तब समझ आया
जब उसके बगैर कुछ दिन गुजारा है
किसी से मुझे अब कोई उम्मीद नहीं है
मेरे जीने का वही एक आख़री सहारा है
उससे मिलने भी नहीं जा पाता
जबकि वो ज्यादा दूर नहीं है
मेरी मां से बढ़ के मेरे लिए
अब और कुछ भी नहीं है

Also Read
बचपन Zindagi Poetry
Hindi Love Poetry
Sad Hindi Poetry

Maa Poem- मेरी मां मुझे बहोत याद आती है

Maa poem in hindi

मेरी जिंदगी में हमेशा से
मेरी माँ ही मेरे लिए सब कुछ है
वो जबतक मेरे पास है
मैं समझता हूं मेरे पास सब कुछ है
जब भी उससे बात करता हूं
मेरी आंख भर आती है
मेरी मां मुझे बहोत याद आती है

आंखों से मेरी जब भी आंसू आए
पल्लू से एक उसी ने पोंछा है
मेरी खुशियों के बारे में भी
सबसे ज्यादा उसी ने सोंचा है
उसके आंचल में रातें कट जाती थीं
अब अंधेरी रात आती है
मेरी मां मुझे बहुत याद आती है

जब उसके पास रहता था
किसी बात की कोई कमी नहीं होती थी
पास में मेरे सिर्फ वही थी
फिर भी आंखों में नमीं नहीं होती थी
दूर हो कर भी पास होने का
वो एहसास दिलाने आती है
मेरी मां मुझे बहुत याद आती है

मुझसे ज्यादा मेरी फिकर करती है
मैं शहर में, वो गांव में रहती है
हमेशा मेरी खुशियां चाहती है
और खुद के गम छुपा के बात करती है
प्यार वो एक बार जता दे
तो ममता हमेशा साथ रह जाती है
मेरी मां मुझे बहुत याद आती है

Maa Poem – वो मां है ना, वो सब जानती है

नौ महीने उसे कोख में रखती है
मन ही मन उससे बातें करती है
हजारों दर्द वो सह लेती है
और प्यार से बच्चे पर हाथ फेरती है
उसका बच्चा ही उसकी खुशी है
वो ये बात मानती है
वो मां है ना, वो सब जानती है

बच्चे की खुशियों की बात हो
तो वो सबसे उलझ जाती है
उसका बच्चा इशारा भी कर दे
तो मां सब समझ जाती है
कांटो को हटाकर उसके लिए
वो फूल बिछाती है
वो मां है ना, वो सब जानती है

बच्चे के साथ खेलते – खेलते
वो बाकी जहां को भूल जाती है
उसके चेहरे पर खुशियां लाने के लिए
वो उसी की तरह बन जाती है
इस दुनिया को वो उसे
अपनी नजरों से दिखाती है
वो मां है ना, वो सब जानती है

जबतक बच्चा चलना सीख नहीं जाता
बच्चे को गोद में लेकर सोती है
उसके जीवन में जैसी परिस्थितियां आती हैं
हमेशा उसकी मां ही उसके साथ होती है
गम का काढ़ा अलग करके
उसके लिए वो प्यार छानती है
वो मां है ना, वो सब जानती है

मुझे तो मेरे हिस्से में मेरी माँ चाहिए

मेरे पैदा होने की सबसे ज्यादा खुशी
शायद मेरी माँ को ही मिली होगी
आंखें उसकी भी शायद गीली हुई होंगी
पर वो मुझे पाके खुद से मिली होगी
जिंदगी के हर मोड़ पर मुझे उसी का प्यार चाहिए
बाकी तुम रख लो,
मुझे तो मेरे हिस्से में मेरी माँ चाहिए

मेरी खुशियों में उसने अपनी खुशी ढूंढी
मुझे खिला कर वो खुद सो गयी भूंखी
अकेले ही सारी मुश्किलों का सामना कर गई
ताकि गीली ना हो मेरी आंखें सुखी
कभी जरूरत पड़े तो मुझे उसी का दुलार चाहिए
बाकी तुम सब रख लो,
मुझे तो मेरे हिस्से में मेरी माँ चाहिए

मै उससे दूर हो गया, कुछ कमियों मे सुधार के लिए
दिल नहीं माँ रहा था उससे दूर जाने के लिए
उसे नी दिखा तो उसने प्यार जताया सवालों से
जब की नींदे कह रही थी उसे सोने के लिए
मेरी खुशियों में वो मुझे हर बार चाहिए
बाकी तुम सब रख लो,
मुझे तो मेरे हिस्से में मेरी माँ चाहिए

उस गली से गुजरा तो मुझे खरोच लग गई
मेरे जख्मो को देख के वो डॉक्टर बन गई
मेरी आँखों में फिर भी उसने सरारत देखी
फिर मलहम लगा के मुझे कुछ अहसास दिला गई
उसके गम मुझे हमेशा सात समंदर पार चाहिए
बाकि तुम रख लो,
मुझे तो मेरे हिस्से में मेरी माँ चाहिए

उसकी भी कुछ अपनी जरुरत थी
पर वो मेरी जरूरतों को पूरा कर रही थी
मैं अपनी खुशियाँ कहीं और ढूंढता था
और वो मुझे देख के खुश हो रही थी
जिंदगी के हर मोड़ पे मुझे उसी का प्यार चाहिए
बाकी तुम रख लो,
मुझे तो मेरे हिस्से में मेरी माँ चाहिए

Maa Par kavita – मां और उसका बच्चा

बच्चा माँ की आँखों का तारा होता है
जो उसे जान से भी प्यारा होता है
जिसे वह हमेशा दुलार करती है
वही उसके आँगन का सितारा होता है।

बच्चे को कठिन परिस्थितियों से बचाती है
बाद में उससे लड़ना सिखाती है
हार का मुँह कभी नहीं देखती
बच्चे को भी जीना सिखाती है।

बच्चे के चेहरे पर मुस्कान लाती है
बड़े प्यार से उसे सहलाती है
सारे काम वह बाद में करती है
पहले उसकी ज़मी को जन्नत बनती है।

आँखों में जब तिनका आ जाता है
पल्लू से उसे हटा देती है
पास खड़ी उसके हर मोड़ पर
हर बार वही नज़र आती है।

सारे जहाँ से खुद है लड़ती
हर दर्द में वो हँसती है
जब बच्चे की आँखों में आँसू हो
तो वो भी नम हो जाती है।

जब बच्चे को चलाना सिखाती है
रास्तों को मखमल बना देती है
होठ उसके खिल उठते है
जब उसे कोशिश करते देखती है।

मंज़िल की शुरुआत यहीं से होती है
जब तक सफल न हो, चैन से न सोती है
और जब बच्चा गिर जाता है
उसका हौसला बनकर उसे फिर उठाती है।

न हो के भी अपनी अहसास दिलाती है
सभी रिश्ते निभाने का साहस देती है
रूक जाते हैं जब कदम आगे बढ़ने से
परछाईं बनकर फिर आ जाती है।

उसका हर बच्चा उसके लिए नूर होता है
वही उसकी देहं, सूरत होता है
वो सबसे ज़्यादा तब खुश होती है
जब उसका बच्चा उसके आँसू पोंछता है।

Maa Poem in hindi – नन्ही जान

ठीक से चलना नहीं आता था
जब ज़िंदगी ने मुझे आगे खींचा
मैं तो अपनी माँ से बिछड़ गया था
फिर नैनो ने बेजान कपड़ो को सींचा

आज एक नन्ही सी जान को देखा
उसके नैनों ने भी कपड़ो को सींचा
माँ से न बिछड़ने की उसने ताकत लगाई
तब कुछ लोगों ने मिल के बेरहमी से खींचा

हँसते हैं फिर कि उन्होंने हम जैसों को हरा दिया
जीतेजी सह न पाए ऐसा ज़हर हमें पिला दिया
गुरुर करते हैं जैसे जग जीत लिया
बेखबर हँसती हुई नन्ही जान को पल में रुला दिया

मत सताओ उसे वो अभी मासूम है
माँ से दूर न जाना कोई गुनाह नहीं है
उसे नफरत कि भाषा समझ नहीं आती
इस दुनिया में न लाओ, वो अभी अनजान है

ऊँगली पकड़ चलना वो अभी सीख रहा है
सुबह होते ही अपनी माँ को ढूंढ रहा है
अलग मत करो उससे उसकी ममता को
अंदर ही अंदर वो बहुत रो रहा है

प्यार नहीं मिलता कहीं और इस जहाँ में
अपनी माँ के आँचल में सब सुख पाएगा
जब कोई नहीं होगा उसके साथ में
तो यह दिन सोच के भर तो जायेगा

—— Mother Poem In Hindi —-


Spread the love

Leave a Comment