Zindagi Poetry In Hindi | Zindagi Poem | जिंदगी कविता

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Zindagi Poetry In Hindi – बचपन के दिन

Zindagi poetry in hindi

ना कुछ खोने का डर था
ना ज्यादा पाने की चाहत थी
सबके साथ मिल जुलकर रहना
हम सब की यही तो आदत थी
सबके साथ खुश रहते थे
जब हम सब छोटे बच्चे थे
ये बड़े होने के बाद समझ में आया
वो बचपन के दिन कितने अच्छे थे

अब हर कोई सबसे जीतना चाहता है
जो आगे उसे खींचना चाहता है
दूसरों की खुशियों से जलन होती है
सिर्फ अपने को खुश देखना चाहता है
तब फरेब का मतलब भी नहीं पता था
सब के सब मन के सच्चे थे
ये बड़े होने के बाद समझ में आया
वो बचपन के दिन कितने अच्छे थे

महलों के अब सब ख्वाब देखते हैं
आसमा सब ने देखा छत पर था
पहली बार जिसे बना कर खुश हुए थे
वो भी एक मिट्टी का ही घर था
खुशियों को अपने हाथ में रखते थे
जब दिमाग के थोड़े कच्चे थे
ये बड़े होने के बाद समझ में आया
वो बचपन के दिन कितने अच्छे थे

हर रोज किसी से झगड़ा होता था
चुप कराते जब भी कोई रोता था
फिर आपस में सब मिल जाते थे
झगड़े हुए अभी एक दिन भी नहीं होता था
कोई हमें भी नापसंद नहीं करता था
जब हम सब छोटे बच्चे थे
ये बड़े होने के बाद समझ आया
वो बचपन के दिन कितने अच्छे थे

Zindagi Poem – जिंदगी

Zindagi poetry

जिंदगी सब की अलग-अलग होती है
कुछ की खुश किस्मत तो
कुछ की दुःखदाई होती है
पर फिर भी वो अपने चेहरे पर
एक हँसी लाने का जरिया ढूंढ ही लेते हैं
इसे ही कहते हैं ज़िंदगी

ज़िंदगी को हम किस तरह देखें
क्या ये मानकर चलेब होती है
कभी पल भर में हँसा देती है
तो कभी पल-पल रुलाती है
कभी ज़िंदगी मुझे, तो कभी
मैं ज़िंदगी को कुछ सिखाता हूँ
कभी मैं इससे तो कभी यह मुझसे रूठती है
पर दोनों ही एक दूसरे की
समझ को समझते हैं
यही तो है जिंदगी

जैसे माँ की कोख से जन्मा हुआ बच्चा
जब चलना सीखता है
तो अनेक बार गिरता है
अगर जो कभी मैं गिरने लगूँ
तो संभालना मत, उसी तरह
मैं भी चलने का हुनर सीख लूँगा
इसी में तो है ज़िंदगी

डर भी लगता है कभी-कभी कि कहीं
तुझे सवारने से पहले तू मेरा साथ न छोड़ दे
साथ देना मेरा तू उन लम्हों तक
जिन लम्हों में मैं अपना नाम लिख दूँ
तब तक एक पहेली बनकर रहना चाहता हूँ
नहीं चाहता कि कोई सुलझा दे
जिस दिन सुलझ जाऊँगा बस
वहीँ तक लिखूंगा मैं अपनी ज़िंदगी

Zindagi Poetry in hindi – जूनून

है जुनून तो निकल पड़
खुद में खुद की तलाश कर
चलने दे इस भीड़ को
तू खुद नई एक राह बन

ये जमाना न किसी का
दगा भी देती हैं साथ दे कर
इन्हें ख्वाब बताकर जो उड़ेगा
काट देंगे ये तेरे पर

सच हो तुम तो दुनिया परे है
झूठ का साथ हो तो पैर पड़े है
यह जान के भी अनजान बन
तू बस आत्म पहचान बन

न जिओ किसी की तारीफ़ पर
उन्हें सिर्फ खुद को देखना आता है
छोड़ जाते हैं आधी गलियों में
तब हर तरफ धुंआ नज़र आता है

है जूनून तो मत ख़तम कर
जैसी भी हैं परिस्तिथियाँ
तू चल के गिरा हो या गिर के चला हो
न बदल दूसरों को देखने का नज़रिया

शायर

जिसके आने से महफिलें
अपना रंग बदल देतीं हैं
जिसके लिए भीड़ जमा होती है
कुछ सुनने के लिए बेक़रार रहती है
उस भीड़ से जो निकल के आ जाए
यारा वो तो शायर ही है

दूसरों के गमों पे
जो मलहम लगा दे
घाव जल्दी भर जाए
कोई ऐसा राज बता दे
अपने गमों को जो हँस के सुना जाए
यारा वो तो शायर ही है

प्यार का मतलब जो प्यार से समझाये
ना मिलने के बाद भी सबसे प्यार जताये
जिंदगी जब उसे कभी रोक दे
वो जिंदगी को कोई राग सुनाये
जिंदगी से लड़ के जो आगे निकल जाए
यारा वो तो शायर ही है

जिस जगह से लोग आगे नहीं बढ़ते
जो अपना रास्ता  वहां से सुरु करें
मंजिल का पता किसी से ना पूछें
राहों पे बस चलता रहें
मंजिल पाने के बाद भी जो आगे बढ़ जाए
यारा वो तो शायर ही है

हवाओं का रुक जो मोड़ दे
सारे मोह-माया को छोड़ दे
मोह-माया में जो टूट गए हैं
उन सबका दिल फिर से जोड़ दे
सबके दिलों पे जो राज करना सीख जाए
यारा वो तो शायर ही है

——- Zindagi Poetry In Hindi —–


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