5+ Best Zindagi Poetry In Hindi | Zindagi Poem | जिंदगी कविता

Spread the love

In this page you will read few Zindagi poetry in hindi, zindagi poem, zindagi kavita, etc…

Zindagi Poetry In Hindi – बचपन के दिन

Zindagi poetry in hindi

ना कुछ खोने का डर था
ना ज्यादा पाने की चाहत थी
सबके साथ मिल जुलकर रहना
हम सब की यही तो आदत थी
सबके साथ खुश रहते थे
जब हम सब छोटे बच्चे थे
ये बड़े होने के बाद समझ में आया
वो बचपन के दिन कितने अच्छे थे

अब हर कोई सबसे जीतना चाहता है
जो आगे उसे खींचना चाहता है
दूसरों की खुशियों से जलन होती है
सिर्फ अपने को खुश देखना चाहता है
तब फरेब का मतलब भी नहीं पता था
सब के सब मन के सच्चे थे
ये बड़े होने के बाद समझ में आया
वो बचपन के दिन कितने अच्छे थे

महलों के अब सब ख्वाब देखते हैं
आसमा सब ने देखा छत पर था
पहली बार जिसे बना कर खुश हुए थे
वो भी एक मिट्टी का ही घर था
खुशियों को अपने हाथ में रखते थे
जब दिमाग के थोड़े कच्चे थे
ये बड़े होने के बाद समझ में आया
वो बचपन के दिन कितने अच्छे थे

हर रोज किसी से झगड़ा होता था
चुप कराते जब भी कोई रोता था
फिर आपस में सब मिल जाते थे
झगड़े हुए अभी एक दिन भी नहीं होता था
कोई हमें भी नापसंद नहीं करता था
जब हम सब छोटे बच्चे थे
ये बड़े होने के बाद समझ आया
वो बचपन के दिन कितने अच्छे थे

Bachpan Ke Din

Na kuchh khone ka dar tha
Na jyaada paane ki chaahat thi
Sabke saath mil julkar rahna
Ham sab kee yahee to aadat thee
Sabke saath khush rahte the
Jab ham sab chhote bachche the
Ye bade hone ke baad samajh mein aaya
Vo bachapan ke din kitne achchhe the

Ab har koee sabse jeetana chaahata hai
Jo aage use kheenchana chaahata hai
Dusaron ki khushiyon se jalan hotee hai
Sirf apne ko khush dekhna chaahata hai
Tab phareb ka matlab bhi nahin pata tha
Sab ke sab man ke sachche the
Ye bade hone ke baad samajh mein aaya
Vo bachapan ke din kitne achchhe the

Mahlon ke ab sab khwaab dekhte hain
Aasama sab ne dekha chhat par tha
Pahli baar jise bana kar khush hue the
Vo bhi ek mitti ka hi ghar tha
Khushiyon ko apane haath mein rakhate the
Jab dimaag ke thode kachche the
Ye bade hone ke baad samajh mein aaya
Vo bachapan ke din kitne achchhe the

Har roj kisi se jhagda hota tha
Chup karate jab bhee koee rota tha
Phir aapas mein sab mil jaate the
Jhagade hue abhee ek din bhee nahin hota tha
Koi hamen bhi na pasand nahin karta tha
Jab ham sab chhote bachche the
Ye bade hone ke baad samajh aaya
Vo bachapan ke din kitne achchhe the

Zindagi Poem – जिंदगी

Zindagi poetry

जिंदगी सब की अलग-अलग होती है
कुछ की खुश किस्मत तो
कुछ की दुःखदाई होती है
पर फिर भी वो अपने चेहरे पर
एक हँसी लाने का जरिया ढूंढ ही लेते हैं
इसे ही कहते हैं ज़िंदगी

ज़िंदगी को हम किस तरह देखें
क्या ये मानकर चले
के जो हो रहा है उसे होने दें
या अभी से ज़िन्दगी को
जीना का सलीखा सीखा दें
इसे में तो है जिंदगी

ज़िन्दगी कभी पल भर में हँसा देती है
तो कभी पल-पल रुलाती है
कभी ज़िंदगी मुझे, तो कभी
मैं ज़िंदगी को कुछ सिखाता हूँ
कभी मैं इससे तो कभी यह मुझसे रूठती है
पर दोनों ही एक दूसरे की
समझ को समझते हैं
यही तो है जिंदगी

जैसे माँ की कोख से जन्मा हुआ बच्चा
जब चलना सीखता है
तो अनेक बार गिरता है
अगर जो कभी मैं गिरने लगूँ
तो संभालना मत, उसी तरह
मैं भी चलने का हुनर सीख लूँगा
इसी में तो है ज़िंदगी

डर भी लगता है कभी-कभी कि कहीं
तुझे सवारने से पहले तू मेरा साथ न छोड़ दे
साथ देना मेरा तू उन लम्हों तक
जिन लम्हों में मैं अपना नाम लिख दूँ
तब तक एक पहेली बनकर रहना चाहता हूँ
नहीं चाहता कि कोई सुलझा दे
जिस दिन सुलझ जाऊँगा बस
वहीँ तक लिखूंगा मैं अपनी ज़िंदगी

Zindagi

Zindagi sab ki alag-alag hoti hai
Kuchh ki khush kismat to
Kuchh kee duhkhdai hotihai
Par phir bhee vo apane chehare par
Ek hansi laane ka jariya dhoondh hee lete hain
Ise hi kahte hain zindagi

Zindagi ko ham kis tarah dekhen
Kya ye maanakar chale
Ke jo ho raha hai use hone den
Ya abhi se zindagi ko
Jeena ka saleekha seekha den
Ise mein to hai zindagi

Zindagi kabhee pal bhar mein hansa detee hai
To kabhi pal-pal rulaati hai
Kabhi zindagi mujhe, to kabhi
Main zindagi ko kuchh sikhaata hoon
Kabhi main isase to kabhi yah mujhse roothati hai
Par donon hi ek dusare ki
Samajh ko samajhate hain
Yahi to hai jindagi

Jaise maan ki kokh se janma hua bachcha
Jab chalana seekhata hai
To anek baar girta hai
Agar jo kabhi main girne lagoon
To sambhalana mat, usi tarah
Main bhi chalane ka hunar seekh lunga
Isi mein to hai zindagi

Dar bhi lagta hai kabhi-kabhi ki kaheen
Tujhe savarane se pahle tu mera saath na chhod de
Saath dena mera tu un lamhon tak
Jin lamhon mein main apna naam likh dun
Tab tak ek paheli bankar rahna chaahata hoon
Nahin chaahata ki koi suljha de
Jis din sulajh jaunga bas
Vaheen tak likhunga main apni zindagi

Zindagi Poetry in hindi – जूनून

1649256049363

है जुनून तो निकल पड़
खुद में खुद की तलाश कर
चलने दे इस भीड़ को
तू खुद नई एक राह बन

ये जमाना न किसी का
दगा भी देती हैं साथ दे कर
इन्हें ख्वाब बताकर जो उड़ेगा
काट देंगे ये तेरे पर

सच हो तुम तो दुनिया परे है
झूठ का साथ हो तो पैर पड़े है
यह जान के भी अनजान बन
तू बस आत्म पहचान बन

न जिओ किसी की तारीफ़ पर
उन्हें सिर्फ खुद को देखना आता है
छोड़ जाते हैं आधी गलियों में
तब हर तरफ धुंआ नज़र आता है

है जूनून तो मत ख़तम कर
जैसी भी हैं परिस्तिथियाँ
तू चल के गिरा हो या गिर के चला हो
न बदल दूसरों को देखने का नज़रिया

शायर

1649256201738

जिसके आने से महफिलें
अपना रंग बदल देतीं हैं
जिसके लिए भीड़ जमा होती है
कुछ सुनने के लिए बेक़रार रहती है
उस भीड़ से जो निकल के आ जाए
यारा वो तो शायर ही है

दूसरों के गमों पे
जो मलहम लगा दे
घाव जल्दी भर जाए
कोई ऐसा राज बता दे
अपने गमों को जो हँस के सुना जाए
यारा वो तो शायर ही है

प्यार का मतलब जो प्यार से समझाये
ना मिलने के बाद भी सबसे प्यार जताये
जिंदगी जब उसे कभी रोक दे
वो जिंदगी को कोई राग सुनाये
जिंदगी से लड़ के जो आगे निकल जाए
यारा वो तो शायर ही है

जिस जगह से लोग आगे नहीं बढ़ते
जो अपना रास्ता  वहां से सुरु करें
मंजिल का पता किसी से ना पूछें
राहों पे बस चलता रहें
मंजिल पाने के बाद भी जो आगे बढ़ जाए
यारा वो तो शायर ही है

हवाओं का रुक जो मोड़ दे
सारे मोह-माया को छोड़ दे
मोह-माया में जो टूट गए हैं
उन सबका दिल फिर से जोड़ दे
सबके दिलों पे जो राज करना सीख जाए
यारा वो तो शायर ही है

——- Zindagi Poetry In Hindi —–


Spread the love

Leave a Comment